बालस्वरूप राही जन्म– १६ मई १९३६ को तिमारपुर, दिल्ली में। शिक्षा– स्नातकोत्तर उपाधि हिंदी साहित्य में।
कार्यक्षेत्र: दिल्ली विश्विद्यालय में हिंदी विभागाध्यक्ष के साहित्यिक सहायक, लेखन, संपादन व दूरदर्शन के लिये लगभग तीस वृत्तिचित्रों का निर्माण। कविता, लेख, व्यंग्य रचनाएँ, नियमित स्तंभ, संपादन और अनुवाद के अतिरिक्त फिल्मों में पटकथा व गीत लेखन।
प्रकाशित कृतियाँ: कविता संग्रह- मौन रूप तुम्हारा दर्पण, जो नितांत मेरी है, राग विराग। बाल कविता संग्रह- दादी अम्मा मुझे बताओ, जब हम होंगे बड़े, बंद कटोरी मीठा जल, हम सबसे आगे निकलेंगे, गाल बने गुब्बारे, सूरज का रथ आदि।
Bal Swaroop Rahi
January 7, 2015
Poems In Hindi
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इस तरह तो दर्द घट सकता नहीं इस तरह तो वक्त कट सकता नहीं आस्तीनों से न आंसू पोंछिये और ही तदबीर कोई सोचिये। यह अकेलापन, अंधेरा, यह उदासी, यह घुटन द्वार तो है बंद, भीतर किस तरह झांके किरण। बंद दरवाजे ज़रा से खोलिये रोशनी के साथ हंसिए बोलिये मौन पीले–पात सा झर जाएगा तो हृदय का घाव खुद …
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