Here is an old poem of Shamsher Bahadur Singh, in praise of ancient motherland India. शमशेर बहादुर सिंह (जन्म: 13 जनवरी, 1911 – मृत्यु: 12 मई, 1993) आधुनिक हिंदी कविता के प्रगतिशील कवि हैं। ये हिंदी तथा उर्दू के विद्वान हैं। प्रयोगवाद और नई कविता के कवियों की प्रथम पंक्ति में इनका स्थान है। इनकी शैली अंग्रेज़ी कवि एजरा पाउण्ड …
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सामान्य ज्ञान क्विज: भारत, संविधान और राजनीति
सामान्य ज्ञान क्विज [1] यद्यपि क्विज बनाने में पूरी सावधानी बरती गई है तथापि किसी भी प्रकार की गलती हो जाने की सम्भावना को नकारा नहीं जा सकता। यदि आपको कहीं कोई गलती मिलती है तो कृपया सूचित करने का कष्ट करें ताकि उचित सुधार किया जा सके। प्रयास किया गया है कि यह हिन्दी क्विज आपका सामान्य ज्ञान बढ़ाने …
Read More »बाल श्रमिक: भारत के बाल मजदूरों पर हिंदी कविता
बाल मजदूरी बच्चों से लिया जाने वाला काम है जो किसी भी क्षेत्र में उनके मालिकों द्वारा करवाया जाता है। ये एक दबावपूर्णं व्यवहार है जो अभिवावक या मालिकों द्वारा किया जाता है। बचपन सभी बच्चों का जन्म सिद्ध अधिकार है जो माता-पिता के प्यार और देख-रेख में सभी को मिलना चाहिए, ये गैरकानूनी कृत्य बच्चों को बड़ों की तरह …
Read More »जन गण मन: भारत का राष्ट्रगान – रबीन्द्रनाथ टैगोर
जन गण मन, भारत का राष्ट्रगान है जो मूलतः बंगाली में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर (ठाकुर) द्वारा लिखा गया था। भारत का राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् है। राष्ट्रगान के गायन की अवधि लगभग 52 सेकेण्ड है। कुछ अवसरों पर राष्ट्रगान संक्षिप्त रूप में भी गाया जाता है, इसमें प्रथम तथा अन्तिम पंक्तियाँ ही बोलते हैं जिसमें लगभग 20 सेकेण्ड का समय …
Read More »मीडिया की सच्चाई: सलीम खान – भारतीय मीडिया पर व्यंग
आज कलम का कागज से मैं दंगा करने वाला हूँ, मीडिया की सच्चाई को मै नंगा करने वाला हूँ। मीडिया जिसको लोकतंत्र का चौंथा खंभा होना था, खबरों की पावनता में जिसको गंगा होना था। आज वही दिखता है हमको वैश्या के किरदारों में, बिकने को तैयार खड़ा है गली चौक बाजारों में। दाल में काला होता है तुम काली …
Read More »भई भाषण दो: गोपाल प्रसाद व्यास – भारतीय राजनीति पर व्यंग्य पूर्ण हिंदी कविता
यदि दर्द पेट में होता हो या नन्हा–मुन्ना रोता हो या आंखों की बीमारी हो अथवा चढ़ रही तिजारी हो तो नहीं डाक्टरों पर जाओ वैद्यों से अरे न टकराओ है सब रोगों की एक दवा भई, भाषण दो, भई, भाषण दो हर गली, सड़क, चौराहे पर भाषण की गंगा बहती है, हर समझदार नर–नारी के कानों में कहती रहती …
Read More »रग-रग में जोश भरता “जन गण मन”: भारत का राष्ट्रगान
राष्ट्रगीत हो या राष्ट्रध्वज देशवासियों के आन-बान और शान के साथ प्रेरणा स्रोत होता है। जो राष्ट्रीय सार्वभौमिकता का प्रतीक है। राष्ट्र के सम्मान का राष्ट्रगान ‘जन गण मन‘ तमाम हिन्दुस्तानियों की शान और जोश का संचार करने वाला ऐसा ही राष्ट्रगान है जो रग-रग में जोश भरता है। दुनिया की अव्वल सर्च इंजन वेबसाइट गूगल के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र …
Read More »दीदी के धूल भरे पाँव: धर्मवीर भारती
दीदी के धूल भरे पाँव बरसों के बाद आज फिर यह मन लौटा है क्यों अपने गाँव; अगहन की कोहरीली भोर: हाय कहीं अब तक क्यों दूख दूख जाती है मन की कोर! एक लाख मोती, दो लाख जवाहर वाला, यह झिलमिल करता महानगर होते ही शाम कहाँ जाने बुझ जाता है – उग आता है मन में जाने कब …
Read More »धुंधली नदी में: धर्मवीर भारती
आज मैं भी नहीं अकेला हूं शाम है‚ दर्द है‚ उदासी है। एक खामोश सांझ–तारा है दूर छूटा हुआ किनारा है इन सबों से बड़ा सहारा है। एक धुंधली अथाह नदिया है और भटकी हुई दिशा सी है। नाव को मुक्त छोड़ देने में और पतवार तोड़ देने में एक अज्ञात मोड़ लेने में क्या अजब–सी‚ निराशा–सी‚ सुख–प्रद‚ एक आधारहीनता–सी …
Read More »भारत का आधार हिंदी Short Poem on Hindi Divas
भारत का आधार हिंदी Short Poem on Hindi Divas भारत का आधार है हिंदी, भारतीय का संस्कार है हिंदी। भारत माँ का प्यार है हिंदी, जय हिन्द का प्रचार है हिंदी।। हिन्द का अभियान है हिंदी, मुस्लिम का ईमान है हिंदी। सिक्खों का गर्व है हिंदी, भारत में एक पर्व है हिंदी।। कविता का उद्गार है हिंदी, अंधकार में प्रकाश …
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