Tag Archives: Contemplation poems for Recitation

परशुराम की प्रतीक्षा: रामधारी सिंह दिनकर की कविता

परशुराम की प्रतीक्षा - रामधारी सिंह दिनकर

परशुराम की प्रतीक्षा: रामधारी सिंह दिनकर – A just society does not occur spontaneously. It has to be nurtured and protected with valor. Here is a poem so characteristic of Ramdhari Singh Dinkar. Compare with his other works like “Shakti Aur Kshma“, “Vijayi Ki Sadrish Jiyo Re” and Rashmirathi in this collection. Before the contemporary poem evolved as an expression …

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नया सूरज लायेंगे: कोरोना व ठंड से घर में बंद बचपन

नया सूरज लायेंगे: कोरोना व ठंड से घर में बंद बचपन

कोरोना व ठंड में दबा बचपन: कोरोना कॉल में घर पर रह कर बच्चे चिड़-चिडे़ हो गए हैं। 6 से 12 साल के बच्चों पर ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। बच्चों में भी डिप्रेशन के लक्षण दिख रहे हैं। खेलकूद बंद होने से बच्चों की दिनचर्या बदली है। बच्चों के बर्ताव में बदलाव दिख रहा है। स्कूल न …

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बुद्ध और नाचघर: हरिवंशराय बच्चन

बुद्ध और नाचघर - हरिवंशराय बच्चन

हरिवंश राय श्रीवास्तव “बच्चन” हिन्दी भाषा के एक कवि और लेखक थे। इलाहाबाद के प्रवर्तक बच्चन हिन्दी कविता के उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों मे से एक हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति मधुशाला है। भारतीय फिल्म उद्योग के प्रख्यात अभिनेता अमिताभ बच्चन उनके सुपुत्र हैं। उन्होने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। बाद में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में …

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शाकाहार: सौरभ जैन सुमन की शाकाहारी जीवन पर कविता

हमारी भारतीय संस्कृति में हमेशा से ही शाकाहार की ओर जोर दिया गया है, लेकिन वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के कई अध्ययनों के बाद शाकाहार का डंका अब विश्व भर में बजने लगा है। शरीर पर शाकाहार के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए दुनिया भर में लोगों ने अब माँसाहार से किनारा करना शुरू कर दिया है। आज इसीलिये पूरे विश्वभर …

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मन को वश में करो, फिर चाहे जो करो: रमानाथ अवस्थी

मन को वश में करो, फिर चाहे जो करो: रमानाथ अवस्थी

रमानाथ अवस्थी का जन्म फतेहपुर, उत्तरप्रदेश में हुआ। इन्होंने आकाशवाणी में प्रोडयूसर के रूप में वर्षों काम किया। ‘सुमन- सौरभ, ‘आग और पराग, ‘राख और शहनाई तथा ‘बंद न करना द्वार इनकी मुख्य काव्य-कृतियां हैं। ये लोकप्रिय और मधुर गीतकार हैं। इन्हें उत्तरप्रदेश सरकार ने पुरस्कृत किया है। मन की चंचलता सर्व विदित है। अध्यात्म सागर पर भी कई बार …

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राह कौन सी जाऊं मैं: अटल जी की चिंतन पर कविता

राह कौन सी जाऊं मैं: अटल जी की चिंतन पर कविता

There are dilemmas in life at every step. What to do? Which alternative to choose? And there are no authentic and correct answers. We must nonetheless make a choice. राह कौन सी जाऊं मैं: अटल बिहारी वाजपेयी चौराहे पर लुटता चीर‚ प्यादे से पिट गया वजीर‚ चलूं आखिरी चाल कि बाजी छोड़ विरक्ति रचाऊं मैं‚ राह कौन सी जाऊं मैं? …

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एक बरस बीत गया: अटल जी की नए साल पर कविता

एक बरस बीत गया - अटल बिहारी वाजपेयी

Another lovely poem by Atal Ji. One more year has passed by and one can just observe and feel inside the emptiness of this uninterrupted yet repetitive stream of passage of time… एक बरस बीत गया: अटल बिहारी वाजपेयी झुलसाता जेठ मास शरद चांदनी उदास सिसकी भरते सावन का अन्तर्घट रीत गया एक बरस बीत गया। सींकचों में सिमटा जग …

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आओ फिर से दिया जलाएँ: अटल की प्रेरणादायक कविता

आओ फिर से दिया जलाएँ - अटल बिहारी वाजपेयी

राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ वाजपेयी एक अच्छे कवि और संपादक भी थे। वाजपेयी ने लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर-अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ब्राह्मण परिवार में 25 दिसंबर, 1924 को इनका जन्म हुआ। पुत्रप्राप्ति से हर्षित पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी को तब शायद ही अनुमान रहा होगा कि आगे चलकर उनका यह नन्हा बालक …

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जीवन बीत चला: अटल की संघर्षमय ज़िन्दगी पर कविता

जीवन बीत चला - अटल बिहारी वाजपेयी

अपने जीवन में अटल बिहारी ने 27 से ज्यादा कविताएं लिखी हैं। आज उनके निधन पर नजर डालिए उन कविताओं पर जो उन्हें अमर बनाती हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ने एक कविता लिखी थी – दूध में दरार पड़ गई – ये कविता काफी लोकप्रिय हुई। उन्होंने इस कविता में देश की समस्या पर चिंता जताई। उनकी कविता कदम से कदम मिलाकर चलना …

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आओ मन की गांठें खोलें: अटल बिहारी वाजपेयी

वाकपटुता कहें, हाज़िरजवाबी कहें या sense of humor कह लें। यह कोई ऐसा गुण नहीं है जिसे राजनीतिक अहर्ताओं में शुमार किया जाता हो। लेकिन यह भी सच है कि इसमें पारंगत नेताओं ने इसका सफल राजनीतिक इस्तेमाल भी किया। दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की गिनती उनमें बिना किसी शुबहे के की जा सकती है। वह अपनी वाकपटुता से न सिर्फ़ …

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